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शिक्षकों के लिए
एक कक्षा, सीखने के अलग रास्ते
किसी कक्षा में कुछ बच्चे 8 + 5 मन में कर लेते हैं, कुछ आगे गिनते हैं और कुछ को वस्तुएँ रखकर देखनी पड़ती हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि उनके लिए तीन अलग पाठ हमेशा बनाने पड़ेंगे। आप एक लक्ष्य रखते हुए संख्या, सहारा और समझाने की माँग बदल सकते हैं।
बड़ी कक्षा या एक कमरे में एक से अधिक कक्षाओं को पढ़ाते समय यह तरीका काम को व्यवस्थित रखता है। उद्देश्य बच्चों को स्थायी “तेज़” और “कमज़ोर” समूहों में बाँटना नहीं है। आज किसी बच्चे को जोड़ में सहारा चाहिए; कल आकृतियों के काम में वही बच्चा उपयोगी विचार दे सकता है।
पहले पता करें कि अड़चन कहाँ है
एक छोटा सवाल दें और देखें: बच्चा संख्या पढ़ पा रहा है? वह जोड़ का मतलब समझता है? उसे गणित आता है लेकिन प्रश्न की भाषा रोक रही है? या वह तरीका समझता है, पर लिखते समय अंक गलत जगह रखता है? इन अड़चनों के सहारे अलग होंगे।
8 + 5 में बच्चा दोनों समूह फिर से गिनता है तो उसे 8 से आगे गिनने का अनुभव दें। बच्चा 8 + 5 को 85 लिखता है तो पहले दो समूह मिलाकर उनका कुल देखना ज़रूरी है। बच्चा 13 कहता है लेकिन बता नहीं पाता तो उससे गोटियों या चित्र से दिखाने को कहें; तुरंत निष्कर्ष न निकालें कि उसने अनुमान लगाया है।
बच्चे से “दिखाओ” कहिए। कभी-कभी उसका चित्र वह बात साफ़ कर देता है जो वह अभी शब्दों में नहीं कह पा रहा।
वस्तु से चित्र और फिर संकेत
10-10 खानों वाली दो पट्टियाँ बनाएँ। पहली पट्टी के 8 खानों में गोटियाँ रखें और 5 गोटियाँ अलग रखें। बच्चा इनमें से 2 गोटियाँ पहली पट्टी में रखकर उसे भर दे, और बची 3 दूसरी पट्टी में रखे। अब 10 और 3 दिखाई देते हैं: 8 + 5 = 13। इसी व्यवस्था का चित्र बनाएँ, फिर 8 + 2 + 3 लिखें।
ये तीन अलग दर्जे नहीं हैं जिनमें हर बच्चा केवल आगे बढ़ सकता है। बड़े सवाल में वस्तु या चित्र पर लौटना उचित है। यदि लिखित सवाल में स्थानीय मान उलझ रहा है, तो दहाई की गड्डियाँ और इकाइयाँ फिर निकालें। सहारा तभी हटाएँ जब बच्चे का अपना तरीका उसके बिना टिक रहा हो।
एक लक्ष्य के लिए तीन काम
लक्ष्य रखें: 20 को दो भागों में बाँटना। पहले काम में बच्चा 20 गोटियाँ दो घेरों में रखे और प्रत्येक घेरे की संख्या लिखे। दूसरे में बिना गोटियों के अलग-अलग जोड़ियाँ लिखे। तीसरे में शर्त दें: दोनों भागों का अंतर 4 हो।
तीसरे काम में 12 और 8 मिलते हैं: 12 + 8 = 20 और 12 8 = 4। बच्चों से पूछें कि 10 और 10 से शुरू करके दोनों भाग कैसे बदलेंगे। एक से 2 लेकर दूसरे में देने पर कुल वही रहता है, लेकिन अंतर 4 होता है। यही विचार आगे 30 के दो भाग, अंतर 6 पर लगाएँ: 18 और 12।
सभी बच्चे कुल और भागों पर काम कर रहे हैं। किसी को गोटियाँ मिली हैं, किसी को लिखित सूची और किसी को अतिरिक्त शर्त। अंत में उनकी खोज एक ही बोर्ड पर साझा की जा सकती है।
सबके लिए शुरुआत, आगे तक सोचने की जगह
चार पर्चियाँ दें: 2, 3, 4 और 5। हर पर्ची एक बार इस्तेमाल करके दो 2-अंकीय संख्याएँ बनाएँ और जोड़ें। शुरू में कोई भी मान्य व्यवस्था स्वीकार करें। बच्चा 23 + 45 = 68 बना सकता है। फिर सवाल खोलें: सबसे बड़ा योगफल कौन-सा बन सकता है? सबसे छोटा?
सबसे बड़े योगफल के लिए 5 और 4 को दहाई में रखें: 53 + 42 = 95। सबसे छोटे के लिए 2 और 3 दहाई में आएँगे: 24 + 35 = 59। इकाई की पर्चियाँ आपस में बदलने पर भी योगफल नहीं बदलता। यहाँ केवल उत्तर नहीं, स्थानीय मान का कारण महत्वपूर्ण है।
आगे सोचने वाले बच्चे सभी व्यवस्थाएँ लिखने के बजाय बताएँ कि कोई बड़ा या छोटा योगफल क्यों संभव नहीं है। अन्य बच्चे दहाई की गड्डियों से अपना चयन समझाएँ। अतिरिक्त चुनौती का अर्थ हमेशा बड़ी संख्याएँ नहीं; बेहतर कारण देना भी चुनौती है।
समूह लचीले रखें
एक गतिविधि के लिए 3 या 4 बच्चों का छोटा समूह बनाएँ। अगले लक्ष्य पर उसकी बनावट बदल सकती है। शिक्षक के साथ वाले समूह को स्थायी नाम या क्षमता का दर्जा न दें। छोटे अवलोकन में लिखें कि किस सहारे से बच्चा आगे बढ़ा और अगली बार क्या देखना है।
जोड़ी में एक बच्चा व्यवस्था बनाए और दूसरा उसे समझाए या जाँचे; फिर भूमिकाएँ बदलें। केवल एक बच्चे को हमेशा उत्तरदाता बनाने से दूसरे का विचार नहीं दिखेगा। एक कमरे में अलग कक्षाएँ हों तो पहले साझा गिनने या पैटर्न का काम शुरू करें, फिर तैयारी के अनुसार संख्या और सवाल बदलें।
घर की भाषा भी गणित का सहारा है
बच्चे भोजपुरी, अवधी, मैथिली, राजस्थानी, बुंदेली या किसी दूसरी घर की भाषा में अपना तरीका बता सकते हैं। उनसे विचार सुनें, चित्र बनवाएँ और फिर हिंदी का शब्द जोड़ें: “तुमने दोनों समूह मिलाए; गणित में इस कुल को योगफल कहते हैं।” घर की भाषा को गलत गणित का संकेत न मानें।
सवाल पढ़ने में अड़चन हो तो उसे छोटे वाक्यों में बोलें और आवश्यक वस्तु दिखाएँ। लेकिन जिस गणित पर काम है, उसे खुद हल करके बच्चे को केवल नकल करने न दें। शब्दों का सहारा अलग है, गणितीय निर्णय अलग।
जल्दी पूरा करने पर क्या दें?
“और 20 सवाल करो” की जगह कहें: दूसरा तरीका दिखाएँ, संबंधित घटाव लिखें, किसी गलत उत्तर के पीछे का तरीका पहचानें या वैसा ही नया सवाल बनाएँ। 12 + 8 = 20 करने वाला बच्चा 20 12 = 8 और 20 8 = 12 से संबंध समझा सकता है।
मदद की ज़रूरत वाले बच्चे के लिए खाली संख्या-रेखा, दहाई का चित्र या काम का पहला कदम दें। पूरा हल लिखकर देने की बजाय एक निर्णय उसके लिए छोड़ें। बाद में उसी तरह का सवाल थोड़ा कम सहारे से दें।
भागीदारी का रास्ता साफ़ रखें
बोर्ड का पाठ साफ़ और पर्याप्त बड़ा हो। केवल रंग से समूह न पहचानें; नाम, आकृति या स्थान भी दें। उत्तर बोलकर, लिखकर, वस्तु रखकर या साथी को बताकर दिया जा सके। यदि विशेष शिक्षक या संसाधन शिक्षक उपलब्ध हों, तो बच्चे के लिए उचित साधन उनके साथ तय करें। उपलब्धता अपने विद्यालय में पूछें, उसे हर जगह मानकर न चलें।
इंडी की चुनौती30 को दो भागों में बाँटिए। दोनों भागों का अंतर 6 है। भाग कौन-से हैं और आप कैसे जाँचेंगे? उत्तर देखें
भाग 18 और 12 हैं। 18 + 12 = 30 और 18 12 = 6। 15 और 15 से शुरू करके एक भाग से 3 दूसरे में देने पर ये भाग मिलते हैं।
अगले काम के लिए छोटे शुरुआती अभ्यास, कारण बताने वाले सवाल और वर्कशीट देखें। सुलभ प्रारूपों को इस्तेमाल से पहले उनकी जाँच संबंधी सूचना के साथ पढ़ें।
इंडी के साथ अभ्यास करें
Beequation Kids गिनती और जोड़-गुणा के तथ्यों को छत्ते वाली पहेलियों में बदल देता है, और बच्चा अटक जाए तो इंडी इशारा देती है। कोई विज्ञापन नहीं, कोई डेटा इकट्ठा नहीं।